हल्द्वानी का ऐतिहासिक इस्लामिया स्कूल बदहाली की कगार पर, कमेटी पर गंभीर आरोप

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हल्द्वानी/उत्तराखंड।
उत्तराखंड के हल्द्वानी में स्थित एक ऐतिहासिक इस्लामिया स्कूल आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कभी जिस तालीमी संस्थान से इलाके के सैकड़ों बच्चों का भविष्य जुड़ा था, आज वही स्कूल बदहाली, अव्यवस्था और अंदरूनी कब्ज़ों का शिकार होता जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रही कमेटी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह पीछे हट चुकी है और हालात को लेकर पूरी तरह बेपरवाह बनी हुई है। स्कूल और मस्जिद से जुड़ी वे संपत्तियाँ, जो वर्षों पहले किराए पर दी गई थीं, उनका किराया आज तक स्कूल/मस्जिद के खाते में जमा नहीं कराया गया।

आरोप यह भी है कि जिन लोगों ने कभी बेहद कम किराए पर ये संपत्तियाँ ली थीं, उन्होंने आगे दूसरों को कई गुना अधिक रकम में किराए पर दे दिया, लेकिन स्कूल को उसका जायज़ हक नहीं मिला।

स्कूल के भीतर हालात और भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं

➡️ स्कूल की इमारत जर्जर अवस्था में है
➡️ मरम्मत की सख्त जरूरत है
➡️ अंदर अवैध कब्ज़ों के आरोप
➡️ बच्चों की संख्या लगातार घट रही है
➡️ दुकानदारों और किराएदारों के बीच रोज़ाना झगड़े और फसाद की स्थिति

स्थानीय मुस्लिम समाज का कहना है कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि तालीम, अमानत और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का सवाल है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
❓ जब रोज़ झगड़े हो रहे हैं
❓ जब स्कूल बर्बादी की कगार पर है
❓ तो जिम्मेदार कमेटी अब तक खामोश क्यों है?
कमेटी पर यह भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्कूल की संपत्ति और किराए की दुकानों से जुड़े रुपए-पैसे का कोई पारदर्शी हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं है। साथ ही कुछ कमेटी सदस्यों की मिलीभगत की भी चर्चाएं सामने आ रही हैं।

आज ज़रूरत है कि मुस्लिम समाज जागे, सवाल पूछे और अपनी आने वाली पीढ़ी की तालीम को बचाने के लिए आगे आए। अगर आज चुप्पी रही, तो कल यह ऐतिहासिक संस्था सिर्फ एक नाम बनकर रह जाएगी।

Royal News Uttarakhand आपसे सवाल पूछता है—
👉 क्या स्कूल या मस्जिद की संपत्ति किसी की निजी जागीर है?

👉 क्या तालीम से जुड़ी अमानत के साथ ऐसा खिलवाड़ जायज़ है?

हम प्रशासन और संबंधित कमेटी से भी इन सवालों पर जवाब की उम्मीद करते हैं।

नोट: हल्द्वानी में इस तरह की और भी कई प्रॉपर्टीज़ हैं। जल्द ही उनसे जुड़े मामलों का भी खुलासा किया जाएगा।

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