हल्द्वानी में बुक सेलर्स पर प्रशासन की सख्ती, कई स्कूलों को नोटिस की तैयारी

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जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल के निर्देशों के तहत हल्द्वानी नगर क्षेत्र में आज बुक सेलर्स के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। प्रशासन द्वारा गठित तीन टीमों ने शहर के विभिन्न बुक डिपो पर छापामार निरीक्षण कर अनियमितताओं की जांच की।

निरीक्षण अभियान के तहत नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार हल्द्वानी के नेतृत्व में शिक्षा विभाग और राज्य कर विभाग की संयुक्त टीमों ने शहर के प्रमुख बुक सेलर्स की जांच की।
नगर मजिस्ट्रेट की टीम ने कालाढूंगी रोड स्थित वर्धमान बुक डिपो, पूरणमल एंड संस और करियर जोन का निरीक्षण किया। वहीं उपजिलाधिकारी की टीम ने मंगलपड़ाव क्षेत्र के पूरणमल एंड संस, दीक्षा बुक डिपो, टुडे बुक डिपो और पी कुमार की दुकानों की जांच की। तहसीलदार की टीम ने कंसल और प्रीत बुक डिपो का निरीक्षण किया।


निरीक्षण के दौरान अभिभावकों से भी फीडबैक लिया गया, जिसमें यह सामने आया कि कुछ विद्यालय विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए स्लिप दे रहे हैं। इस पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विद्यालयों के खिलाफ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।


📚 जांच में सामने आईं अहम बातें:
कुछ विद्यालयों में प्ले ग्रुप से लेकर यूकेजी तक कक्षाएं संचालित होने की पुष्टि, मान्यता की जांच के आदेश
कई स्कूलों में गैर-एनसीईआरटी पुस्तकों का चलन, औचित्य की जांच शुरू
अतिरिक्त पुस्तकों की कीमतें एनसीईआरटी किताबों से अधिक पाई गईं
बुक सेलर्स से सभी स्कूलों की बुक लिस्ट और रेट लिस्ट जुटाई गई

🔍 आगे की कार्रवाई:
टीमों द्वारा एनसीईआरटी पुस्तकों के रेंडम सैंपल भी एकत्र किए गए हैं, जिनके आईएसबीएन नंबर सहित विवरण सत्यापन के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजे जा रहे हैं।
इसके अलावा बुक सेलर्स के बिलों की भी जांच की गई, जिसमें विस्तृत परीक्षण के लिए राज्य कर विभाग को निर्देश दिए गए हैं।


📢 प्रशासन के निर्देश:
सभी दुकानों पर पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और शेड अनिवार्य
20 अप्रैल 2026 तक यूनिफॉर्म और किताबों की अनिवार्यता में छूट का सर्कुलर दुकानों पर चस्पा
पढ़ाई बाधित न करने के निर्देश


👥 निरीक्षण में शामिल अधिकारी:
खंड शिक्षा अधिकारी गीतिका जोशी, सहायक आयुक्त अश्वनी सिंह, गौतम भंडारी, कुंदन पांगती, प्रधानाचार्य आशीष शर्मा, राजेंद्र सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

 

प्रशासन के इस सख्त अभियान से साफ है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए अब नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई संभव है।

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