नैनीताल प्रशासन का निजी स्कूलों पर शिकंजा, 12 और स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी

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*अब तक 101 निजी विद्यालयों पर कार्रवाई, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने के आरोप*

हल्द्वानी, 9 मई 2026। जनपद नैनीताल में निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 89 स्कूलों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। अब जनपद में नोटिस पाने वाले निजी विद्यालयों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है।


नोटिस प्राप्त करने वाले विद्यालयों में सेंट लॉरेंस स्कूल देवलचौड़, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल, केवीएम पब्लिक स्कूल हीरानगर, माउंट लीटेरा जी स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, ओरम द ग्लोबल स्कूल, जस गोविन स्कूल, डीएवी स्कूल, नैनी वैली स्कूल, गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल और टीआरवी स्कूल शामिल हैं।


*क्या हैं आरोप?*
जांच के दौरान सामने आया कि कई निजी विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य की जा रही थीं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। इसके अलावा कुछ स्कूलों पर विशेष दुकानों से किताबें और शिक्षण सामग्री खरीदने का दबाव बनाने के भी आरोप लगे हैं। कई विद्यालयों ने अपनी वेबसाइट पर पुस्तक सूची और शुल्क संरचना जैसी अनिवार्य जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की।


*15 दिन में देना होगा जवाब*
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी संबंधित विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि—
एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देते हुए संशोधित पुस्तक सूची जारी करें।

किसी विशेष विक्रेता से खरीद की बाध्यता तुरंत समाप्त करें।
वेबसाइट पर फीस और पुस्तक सूची सार्वजनिक करें।
अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि का समायोजन/धनवापसी करें।
अतिरिक्त शुल्कों को आगामी फीस में समायोजित किया जाए।


*नहीं माने तो होगी सख्त कार्रवाई*
जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में आदेशों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


प्रशासन की इस कार्रवाई से अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है।

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