सूरजकुंड झूला हादसा: सिस्टम की लापरवाही ने ली जान, अब जिम्मेदारों के नाम भी सामने

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फरीदाबाद | 8 फरवरी
सूरजकुंड मेला परिसर में 7 फरवरी को हुए झूला हादसे ने सुरक्षा इंतज़ामों और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में घायलों को बचाते हुए हरियाणा पुलिस के निरीक्षक जगदीश प्रसाद शहीद हो गए, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हिमाचल फन केयर कंपनी के प्रोपराइटर मोहम्मद शाकिर (निवासी—टोका नंगला, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) और नितेश (निवासी—धर्मपुरी सदर, मेरठ कैंट, उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और आगे और नाम सामने आ सकते हैं।

हादसे के बाद हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता के आदेश पर पुलिस उपायुक्त (अपराध) की निगरानी में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। SIT झूले की तकनीकी स्थिति, फिटनेस सर्टिफिकेट, बिजली सुरक्षा और अनुमति प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

इस हादसे में कुल 12 लोग घायल हुए, जिनमें पुलिसकर्मी और आम नागरिक शामिल हैं। सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। लेकिन निरीक्षक जगदीश प्रसाद की शहादत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मेले की सुरक्षा कागज़ों तक सीमित रह गई थी?

सबसे गंभीर पहलू यह है कि यही झूला संचालक पहले हल्द्वानी समेत कई शहरों में मेले लगा चुके हैं, जहां झूलों में करंट आने जैसी शिकायतें सामने आई थीं और प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी थी। इसके बावजूद यदि ऐसे संचालकों को दोबारा अनुमति दी जाती है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

Royal news uttarakhand का सीधा सवाल — क्या जिम्मेदारी सिर्फ झूला संचालकों तक सीमित रहेगी, या अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी? जब लाखों लोग मेले में पहुंचते हैं, तो सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है?

सूरजकुंड हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा बन चुका है। यदि अब भी सख्त और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली घटना के लिए जिम्मेदार सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था मानी जाएगी।

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